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“सड़क सुरक्षा ही जीवन रक्षा” – कोमाखान की यादगार सुबह

सुबह का सूरज धीरे-धीरे आसमान पर चढ़ रहा था। SAGES कोमाखान का प्रांगण विद्यार्थियों की चहल-पहल से गुलज़ार था। मंच पर कुर्सियाँ करीने से सज चुकी थीं, माइक चमक रहा था और सामने बैठे छात्र-छात्राओं की आँखों में उत्सुकता साफ झलक रही थी।

तभी घोषणा घोषणा होती है कि –
“मुख्य अतिथि अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री उमेश कुमार साहू पधार चुके हैं।”
सारा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके साथ तहसीलदार श्री हरीशकांत ध्रुव और थाना प्रभारी श्री नितेश सिंह,विकासखंड शिक्षा अधिकारी बागबाहरा वर्मा सर भी मंचासीन हुए।

वातावरण में एक अजीब-सा रोमांच था… जैसे किसी फिल्म का पहला दृश्य शुरू होने वाला हो।

वाद-विवाद प्रतियोगिता का आगाज़

घंटी बजी और पहला छात्र माइक तक पहुँचा। उसकी आवाज़ में जोश था –
“सड़क सुरक्षा का पालन करना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है!”
तालियाँ गूंज उठीं।

दूसरा वक्ता आगे आया। उसने भावनाओं के साथ कहा –
“दुर्घटना केवल सड़क पर नहीं होती… वह उस घर में होती है, जहाँ पिता का सहारा छिन जाता है या माँ की आँखों का तारा हमेशा के लिए खो जाता है।”
सुनते ही हॉल एक पल के लिए मौन हो गया। कुछ चेहरों पर गहरी गंभीरता उतर आई।

जैसे-जैसे विद्यार्थी बोलते गए, ऐसा लगा मानो पूरा सभागार सड़क सुरक्षा की गाथा गा रहा हो।

मुख्य अतिथि उमेश कुमार साहू का गूंजता संदेश

फिर वो क्षण आया, जिसका सभी को इंतज़ार था।
अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) उमेश कुमार साहू माइक पर आए। उनकी गहरी आवाज़ पूरे सभागार में फैल गई –
“सड़क दुर्घटनाएँ केवल आँकड़े नहीं हैं… वे टूटे हुए सपने हैं, किसी माँ का बिखरा हुआ आंचल हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट कोई औपचारिकता नहीं… ये जीवन रक्षा के कवच हैं।”

उनके शब्दों के साथ माहौल और भी गम्भीर हो गया। एक-एक वाक्य बच्चों के दिल में तीर की तरह उतर रहा था।

श्री साहू के उद्बोधन के दौरान कुछ बच्चे पीछे बातें कर रहे थे
पीछे बैठे एक छात्र ने अपने दोस्त से फुसफुसाकर कहा –
“आज के बाद मैं बिना हेलमेट स्कूटी नहीं चलाऊँगा।”
दोनों के चेहरे पर एक दृढ़ संकल्प साफ झलक रहा था।

थाना प्रभारी नितेश सिंह की अपनेपन से भरी सीख

इसके बाद मंच संभाला थाना प्रभारी नितेश सिंह ने। वे मुस्कराते हुए बोले –
“लोग कहते हैं पुलिस का काम सिर्फ चालान काटना है… लेकिन सच्चाई यह है कि हम किसी की जेब नहीं, उसकी जिंदगी बचाना चाहते हैं।”
“याद रखिए! एक हेलमेट आपकी खोपड़ी नहीं, आपकी जिंदगी बचाता है। सीट बेल्ट केवल धागा नहीं, यह आपके परिवार की उम्मीदों की डोर है।”

हॉल तालियों से गूंज उठा। बच्चे तालियों के साथ उनके शब्दों पर सहमति जता रहे थे।

तहसीलदार हरीशकांत ध्रुव की सोच

फिर बोले तहसीलदार श्री हरीशकांत ध्रुव
“सरकार नियम बना सकती है, पुलिस निगरानी कर सकती है… लेकिन असली जिम्मेदारी हम सबकी है। सड़क पर चलना मतलब अनुशासन का पालन करना।”
उनकी यह सधी हुई आवाज़ मानो हर किसी को खुद से सवाल पूछने पर मजबूर कर रही थी।

प्रतियोगिता का परिणाम और जोश

कड़ी टक्कर के बाद जब परिणाम घोषित हुए तो हॉल एक बार फिर तालियों से गूंज उठा –
प्रथम स्थान – SAGES कोमाखान
द्वितीय स्थान – SAGES बागबाहरा
तृतीय स्थान – हायर सेकंडरी स्कूल बकमा घुंचापाली

विजेताओं के चेहरे चमक रहे थे, वहीं दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहने वाले भी यह यह ठान चुके थे कि अगली बार मंच पर उनका नाम ज़रूर गूंजेगा।

समापन का संकल्प

अंतिम क्षणों में जब निर्णायकगण, शिक्षक और सभी विद्यार्थी खड़े होकर एक स्वर में बोले –
“सड़क सुरक्षा ही जीवन रक्षा है, और इसे हम अपने जीवन का हिस्सा बनाएँगे।”
तो वह दृश्य किसी फिल्म के क्लाइमैक्स जैसा था।
तालियाँ गूंज रही थीं… और हर दिल में एक ही आवाज़ थी – अब बदलाव लाना है।

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