
मुड़पार से छात्रावास छीनने की कोशिश पर बवाल – तीन गांवों के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
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बागबाहरा। आदिवासी अंचल में शिक्षा के लिए स्वीकृत छात्रावास को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। ग्राम पंचायत झिटकी अंतर्गत ग्राम मुड़पार के लिए स्वीकृत आदिवासी बालक छात्रावास को हटाने की कवायद से नाराज ग्रामीण अब आंदोलन की राह पर हैं।

पहले सौंपा था ज्ञापन, कार्रवाई न होने पर बुलाई बैठक
ग्रामीणों ने बताया कि विगत दिनों कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन उस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद रविवार को तीन गांवों के ग्रामीणों ने बड़ी बैठक बुलाई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए और सामूहिक रूप से छात्रावास छीनने के प्रयास का विरोध करने का निर्णय लिया।
बैठक में गूंजे नारे
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की।
“एक तीर एक कमान, आदिवासी एक समान”,
“छत्तीसगढ़ के मूल निवासी – आदिवासी आदिवासी”
जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
राजनीतिक दबाव में हक छीने जाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव में छात्रावास को मुड़पार से दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोशिश हो रही है, जबकि इसकी स्वीकृति खास तौर पर मुड़पार के लिए हुई है। इसे कहीं और ले जाना आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और उनके अधिकार पर सीधा डाका है।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र, वर्षों से चल रहा संघर्ष
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि ग्राम मुड़पार माड़ा पाकेट आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समुदाय की है। ग्रामीण लंबे समय से छात्रावास की मांग कर रहे थे। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद आसपास के अनेक गांवों के छात्रों को पढ़ाई का बड़ा सहारा मिलता। शासकीय हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए मुड़पार सबसे उपयुक्त स्थान है।
सभी प्रक्रिया पूरी, फिर भी रोड़ा
ग्रामीणों ने बताया कि धरती आं.बा. जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA – PM-JUGA) के तहत छात्रावास निर्माण हेतु पंचायत प्रस्ताव, नक्शा, खसरा, पटवारी प्रतिवेदन, अनापत्ति प्रमाण पत्र और सहमति पत्र पहले ही सौंपे जा चुके हैं। चयनित स्थल का निरीक्षण भी अधिकारियों द्वारा कर लिया गया था और ग्रामवासियों ने स्थल की साफ-सफाई तक कर दी थी। इसके बावजूद छात्रावास को दूसरी जगह ले जाने की कवायद अनुचित है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि छात्रावास को मुड़पार से हटाया गया तो वे बड़े आंदोलन की राह अपनाने पर मजबूर होंगे। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि आदिवासी बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए छात्रावास केवल मुड़पार में ही स्थापित किया जाए और राजनीति के कारण उनके हक से खिलवाड़ न किया जाए।
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