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प्रेम प्रसंग में पागलपन – 65 साल के बुजुर्ग ने 26 वर्षीय महिला की हत्या, मासूम बेटा भी घायल

प्रेम प्रसंग की आड़ में महिला की निर्मम हत्या – गांव में दहशत का माहौल
हमने चाहा तुझे… तूने चाहा किसी और को” – एक पागलपन भरी सोच ने ले ली मासूम की मां की जान

धमतरी/मगरलोड।
धमतरी जिले के मगरलोड थाना अंतर्गत बड़ी करेली चौकी के ग्राम हसदा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। प्रेम प्रसंग के चक्कर में 65 वर्षीय बुजुर्ग जगन्नाथ ने गांव की ही 26 वर्षीय महिला पुष्पलता मार्कण्डेय की चाकू मारकर हत्या कर दी। इस वारदात से पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है।

अकेली महिला बनी शिकार


पुलिस के अनुसार मृतका पुष्पलता का पति बीते एक वर्ष से जेल में बंद है। वह अपने तीन वर्षीय बच्चे के साथ अकेली जीवन यापन कर रही थी। इसी बीच गांव के बुजुर्ग जगन्नाथ का उस पर झुकाव बढ़ा, और वह महिला से संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था। लेकिन जब उसे महिला की किसी और से निकटता की जानकारी मिली तो उसने नृशंस कदम उठाया।

निर्दयी वारदात और मासूम पर हमला


23 अगस्त की रात करीब 8 बजे आरोपी ने पुष्पलता पर चाकू से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसने महिला के मासूम 3 वर्षीय बेटे पर भी चाकू से हमला किया। गनीमत रही कि बच्चा बच गया और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

गांव में मातम और खौफ


हत्या की खबर फैलते ही गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मगरलोड पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी जगन्नाथ को हिरासत में ले लिया। फिलहाल हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई जानने पुलिस गहन जांच कर रही है।

समाज के लिए बड़ा सवाल


यह घटना न केवल एक महिला की हत्या है, बल्कि समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय भी है। एक बुजुर्ग का 26 वर्षीय महिला के प्रति आसक्ति और उसे पाने की सनक यह दर्शाती है कि मानसिक विकृति किस हद तक इंसान को हैवान बना सकती है।
यह घटना उस मानसिकता पर सवाल उठाती है, जहां “न पाने पर खत्म कर दो” जैसी सोच जन्म लेती है। प्यार किसी का अधिकार नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास का रिश्ता है। किसी के इंकार को स्वीकार करना भी उतना ही जरूरी है जितना स्वीकार किए जाने की खुशी।

जरूरी है कठोर कार्रवाई और जागरूकता
पुष्पलता की हत्या ने साबित कर दिया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सिर्फ कानून नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी है। ऐसे मामलों में कठोरतम सजा ही समाज के लिए नजीर बन सकती है।

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