
कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सुगबुगाहट तेजमिशन 2028 पर हाईकमान का फोकस, कई नामों पर मंथन ।
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रायपूर । छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान आने वाले 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ में भी नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सुगबुगाहट तेज होती दिखाई दे रही है।
वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की सक्रियता को लेकर पार्टी में किसी तरह की असंतोष की स्थिति नहीं है। वे लगातार जिलों का दौरा कर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम कर रहे हैं। बावजूद इसके, हाईकमान का फोकस पूरी तरह मिशन 2028 पर है और संगठन को नए सिरे से धार देने के लिए नए चेहरे की तलाश की जा रही है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक सीटें हासिल की जा सकें।

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कई दिग्गज और उभरते नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव, विधायक एवं पूर्व मंत्री उमेश पटेल और राष्ट्रीय सचिव देवेंद्र यादव प्रमुख हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ और अनुभवी नेता पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव का नाम इस दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है। स्वयं सिंहदेव यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपती है तो वे आदेश स्वीकार करेंगे। राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व उनके कामकाज से भलीभांति परिचित हैं। उनके नेतृत्व में तैयार घोषणापत्र और छत्तीसगढ़ के दौरों से कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचने में मदद मिली थी, जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है।


वहीं, विधायक एवं पूर्व युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री उमेश पटेल भी एक मजबूत दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं। वे झीरम घाटी कांड में शहीद हुए स्वर्गीय नंदकुमार पटेल के पुत्र हैं, जो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके थे। उमेश पटेल का संगठनात्मक अनुभव, युवा ऊर्जा और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राहुल गांधी से करीबी संबंध उन्हें इस दौड़ में मजबूत बनाते हैं।

तीसरा अहम नाम देवेंद्र यादव का है, जो वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं। भारत जोड़ो यात्रा में उनकी सक्रिय भूमिका के बाद वे राहुल गांधी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने लगे हैं। जेल में रहते हुए ही उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया जाना उनके बढ़ते राजनीतिक कद को दर्शाता है। युवा वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ है और वे वर्तमान में बिहार के सहप्रभारी भी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और संगठनात्मक अनुभव का लाभ उन्हें भी मिल सकता है।

अब पार्टी के सामने यह बड़ा सवाल है कि प्रदेश अध्यक्ष की कमान एक अनुभवी नेता को सौंपी जाए या फिर किसी युवा और ऊर्जावान चेहरे को आगे बढ़ाया जाए। तीनों नेताओं के अपने-अपने मजबूत पक्ष हैं और अंतिम फैसला हाईकमान के हाथ में है।
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में भाजपा की गिरती लोकप्रियता कांग्रेस के लिए अवसर के रूप में देखी जा रही है। सरकार के कई फैसलों को लेकर जनमानस में असंतोष है, जिससे भाजपा के ग्राफ में गिरावट की चर्चा है। इसका सीधा लाभ आगामी चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है।
हालांकि, छत्तीसगढ़ की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते रहे हैं। महतारी वंदन योजना जैसे मुद्दे कहीं भाजपा को दोबारा जनता का समर्थन दिला दें, यह भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह साफ नजर आ रहा है कि भाजपा दबाव में है और चुनावी नतीजे इस बार चौंकाने वाले हो सकते हैं।
अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं कि छत्तीसगढ़ में संगठन की कमान आखिर किस नेता को सौंपी जाती है और मिशन 2028 के लिए पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ती है।





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