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धमतरी में खबर का असर: The Hawker News की खबर के बाद जागे नेता, शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर साफ हुई प्रतिमा, उठे कई तीखे सवाल

The Hawker News के उप संपादक विक्रांत शर्मा उर्फ बिट्टू भैया की भूमिका रही अहम

क्या शास्त्री जी की उपेक्षा इसलिए हुई क्योंकि वे किसी ऐसे दल से नहीं जुड़े थे, जिनका वर्तमान में स्थानीय नगरीय शासन, राज्य सरकार और केंद्र की सत्ता से सीधा संबंध हो ? क्या यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि को नजरअंदाज कर दिया गया ?

धमतरी। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर धमतरी में जो कुछ देखने को मिला, उसने व्यवस्था और राजनीति दोनों पर सवाल खड़े कर दिए।

11 जनवरी 1966 को देश को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीलाल बहादुर शास्त्री जी का निधन हुआ था। लेकिन उनकी पुण्यतिथि के दिन धमतरी के घड़ी चौक पर स्थापित उनकी प्रतिमा उपेक्षा की तस्वीर बनी रही।

पुण्यतिथि के दिन सुबह तक न तो किसी राजनीतिक दल के नेता पहुंचे और न ही नगर निगम या प्रशासन की ओर से कोई साफ-सफाई या श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रतिमा धूल और गंदगी से पटी रही।

यह स्थिति तब तक बनी रही, जब तक The Hawker News ने इस लापरवाही को सामने लाते हुए खबर नहीं चलाई। खबर प्रसारित होने के बाद राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को शास्त्री जी की याद आई।

The Hawker News की खबर का असर यह रहा कि क्रमशः दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता घड़ी चौक पहुंचे। सबसे पहले कांग्रेसजन मौके पर पहुंचे। कांग्रेसियों ने प्रतिमा और उसके आसपास के स्थान की पानी से धुलाई कर साफ-सफाई की। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इस दौरान अपनी नाराजगी भी जाहिर की और इस बात पर ऐतराज जताया कि पुण्यतिथि जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रतिमा की यह हालत क्यों रही।

इसके कुछ समय बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता भी वहां पहुंचे और उन्होंने भी माल्यार्पण कर शास्त्री जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय प्रशासन नगर निगम की भूमिका पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

क्या यह नगर निगम का दायित्व नहीं है कि शहर में स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की नियमित देखरेख करे और उनकी जन्म जयंती व पुण्यतिथि के अवसर पर साफ-सफाई के साथ एक छोटा सा सम्मान समारोह आयोजित करे?

या

फिर हर बार किसी न्यूज़ चैनल को ही इन्हें उनका कर्तव्य याद दिलाना पड़ेगा ?

यह भी सवाल उठ रहा है कि कांग्रेसजन स्वयं भी शुरुआत में शास्त्री जी की पुण्यतिथि को भूल गए थे, लेकिन खबर आने के बाद उन्होंने जल्दबाजी में कार्यक्रम कर अपनी भूल सुधार ली।

ऐसे में क्या यह केवल सम्मान का विषय था या फिर इसका राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास भी कहीं न कहीं शामिल था?

यह प्रश्न भी चर्चा में है कि –

क्या शास्त्री जी की उपेक्षा इसलिए हुई क्योंकि वे किसी ऐसे दल से नहीं जुड़े थे, जिनका वर्तमान में स्थानीय, राज्य और केंद्र की सत्ता से सीधा संबंध हो ? क्या यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि को नजरअंदाज कर दिया गया ?

The Hawker News के उप संपादक विक्रांत शर्मा उर्फ बिट्टू भैया की भूमिका रही अहम

इस पूरे मामले में The Hawker News के उप संपादक विक्रांत शर्मा उर्फ बिट्टू भैया की भूमिका अहम रही, जिनकी नजर इस चूक पर पड़ी और जिन्होंने खबर चलाकर नेताओं व राजनीतिक दलों को उनकी कुंभकरणीय नींद से जगाया। यदि यह खबर सामने नहीं आती, तो संभवतः पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री जी की पुण्यतिथि यूं ही गुजर जाती और उनकी प्रतिमा धूल में ढकी रहती।स्थानीय जनता के मन में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या शास्त्री जी की उपेक्षा इसलिए हुई क्योंकि वे किसी ऐसे दल से नहीं जुड़े थे, जिनका वर्तमान में स्थानीय, राज्य और केंद्र की सत्ता से सीधा संबंध हो। क्या यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि को नजरअंदाज कर दिया गया।धमतरी क्षेत्र की जनता अब यह अपेक्षा कर रही है कि प्रशासन और नगर निगम भविष्य में ऐसे महापुरुषों के सम्मान को खबरों के भरोसे न छोड़े, बल्कि स्वयं पहल करते हुए उनकी स्मृतियों के प्रति सम्मान व्यक्त करे।

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