
नगर निगम धमतरी के एक विभाग के बाबु के हाई फाई डिमांड से लोग परेशान! इसे भ्रष्टाचार कहे कि शिष्टाचार ?
इसे भ्रष्टाचार कहे कि शिष्टाचार ?
पैसा मेरे जेब में नहीं राजधानी के सम्बन्धित विभाग में पहुंचाना पड़ता है!


धमतरी / पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा की कसम खुदा से कम नहीं सायद यही लत निगम के एक विभाग के बाबु को लग गई है ये बाबु बड़े लंबे समय से उस विभाग में जमा हुआ है और हम इशारा भी करना चाहेंगे कि वह विभाग में निगम के रिटायर पूर्व कर्मचारी जो रिटायर होने के पश्चात अपने काम काज को आगे बढ़ाने उस बाबु से मिलते है तो बाबु बिना किसी खौफ बिना किसी डर के सीधे डिमांड पर आ जाता है कुछ लोगों का कहना है कि मोटे रकम लेने के बाद भी अभी तक काम नहीं हुआ है बाबु से मिलने के बाद कहना होता है ये राशि मेरे जेब में नहीं राजधानी के सम्बन्धित विभाग में पहुंचाना पड़ता है!
किसके संरक्षण में बाबू के हौसले बुलंद !
इस बाबू को आखिर किसका संरक्षण होगा जो बड़े हिम्मत के साथ काम करवाने के एवज़ में रिटायरो के काम को आगे बढ़ाने रकम की राशि देने पर ही फाइल को आगे बढ़ने पर चर्चा होता है
आदमी देखकर राशि कम ज्यादा होता है !
इस बाबू की एक खूबी यह है की रकम की राशि आदमी देखकर कम ज्यादा किया जाता है लेकिन यह रिश्वतखोरी में किसी को नहीं बक्शा जाता चढ़ावा देना ही पड़ता है क्योंकि इस विभाग में चढ़ावा को भ्रष्टाचार नहीं शिष्टाचार कहा जाता है !
राशि मेरे जेब में नहीं राजधानी पहुंचता है !
कुछ लोगों का काम तो अभी तक नहीं हुआ है जबकि उनका कहना है कि वह काम के लिए बाबू को चढ़ावा भी दे चुके हैं लेकिन मोटे रकम होने के बाद भी अभी तक काम नहीं हुआ है बाबू से मिलने के बाद कहना होता है यह राशि मेरे जेब में नहीं राजधानी के संबंधित विभाग में पहुंचाना पड़ता है जब काम होगा आपको खबर कर दिया जाएगा।





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