
चिकित्सा इतिहास में दर्ज हुई बड़ी उपलब्धि…जिला मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ क्वाड्रुपलेट प्रेग्नेंसी का कराया गया सफल प्रसव…मां और चारों नवजात बच्चियां सुरक्षित…
चिकित्सा इतिहास में दर्ज हुई बड़ी उपलब्धि…
जिला मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ क्वाड्रुपलेट प्रेग्नेंसी का कराया गया सफल प्रसव…
मां और चारों नवजात बच्चियां सुरक्षित…


महासमुंद। शासकीय मेडिकल कॉलेज सह जिला चिकित्सालय के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में बीते शनिवार कोचिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। 34 सप्ताह की गर्भावस्था में चार बच्चों वाली अत्यंत दुर्लभ क्वाड्रुपलेट प्रेग्नेंसी का सफल सिजेरियन प्रसव कराते हुए मां और चारों नवजात बच्चियों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, जो इस जटिल केस की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
यह उल्लेखनीय है कि इस पूरे जटिल ऑपरेशन और प्रेग्नेंसी प्रबंधन की कमान चार महिला डॉक्टरों ने संभाली। इस जटिल प्रसव को सफल बनाने वाली टीम में डॉ. नेहा ठाकुर (विभागाध्यक्ष), डॉ. गरिमा सतपती (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. प्रतिमा कोशवारा (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. दर्शना (सीनियर रेज़िडेंट) एवं समर्पित नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता, निरंतर निगरानी और समन्वित टीमवर्क के चलते यह दुर्लभ केस पूरी तरह सफल रहा।
मरीज़ पुष्पा ध्रुव (27 वर्ष), पति भोजराम ध्रुव, निवासी चौकापारा, जिला नुआपाड़ा, ओडिशा, पहली बार गर्भवती थीं और लंबे समय से जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में थीं। 33 सप्ताह में एहतियातन भर्ती किए जाने के बाद 34वें सप्ताह में लीकेज की समस्या सामने आई, जिस पर डॉक्टरों ने तत्काल निर्णय लेते हुए सिजेरियन ऑपरेशन किया।ऑपरेशन के माध्यम से महिला ने चार बच्चियों को जन्म दिया। सभी नवजात समय से पूर्व जन्मे हैं, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की तत्परता के कारण मां और चारों बच्चियां सुरक्षित हैं।
चारों बच्चियों का वजन क्रमशः 1.380 किलोग्राम, 1.160 किलोग्राम, 1.520 किलोग्राम एवं 1.580 किलोग्राम है। फिलहाल उन्हें नर्सरी में विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया है और उनकी स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है।
फैक्ट बॉक्स | क्यों खास है यह केस?
अत्यंत दुर्लभ प्रेग्नेंसी
चार बच्चों (क्वाड्रुपलेट) की स्वाभाविक गर्भावस्था लगभग 5 से 7 लाख मामलों में किसी एक में ही होती है।
मां और चारों नवजात पूरी तरह सुरक्षित
उच्च जोखिम वाले इस केस में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद मां और चारों बच्चियों की स्थिति स्थिर और सुरक्षित है।
महिला डॉक्टरों की अगुवाई में सफलता
शासकीय मेडिकल कॉलेज सा जिला चिकित्सालयकी महिला एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD), असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेज़िडेंट सहित चार महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता व टीमवर्क से यह उपलब्धि संभव हुई।
पहली गर्भावस्था में क्वाड्रुपलेट केस
मरीज़ पहली बार गर्भवती थीं, जिससे यह केस और भी जटिल व चुनौतीपूर्ण हो गया।
समय से पहले जन्म, फिर भी बेहतर परिणाम
34 सप्ताह में प्रसव के बावजूद चारों बच्चियों का सुरक्षित जन्म और तत्काल नर्सरी केयर सुनिश्चित की गई।
जिला स्तर पर उच्चस्तरीय चिकित्सा का उदाहरण
यह केस जिला मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं, समय पर निर्णय और उन्नत चिकित्सा प्रबंधन की क्षमता को दर्शाता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार क्वाड्रुपलेट गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा जाता है, ऐसे में मां और नवजातों को सुरक्षित रखना किसी भी मेडिकल टीम के लिए बड़ी चुनौती होती है। इस केस में महिला डॉक्टरों की सूझबूझ, अनुभव और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत रंग लाई, जिसके चलते यह सफलता संभव हो सकी।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी ने इस उल्लेखनीय सफलता पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल जिला मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि समर्पित टीमवर्क से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।





Touch Me