
आरोप प्रत्यारोप के जाल में उलझा धमतरी नगर निगम। मलीन राजनीतिक आईना बनता प्रशासनिक तंत्र…
विक्रांत शर्मा, पत्रकार
आरोप-प्रत्यारोप के जाल में उलझा धमतरी नगर निगम: मलीन राजनीति का आईना बनता प्रशासनिक तंत्र
धमतरी। नगर निगम धमतरी में इन दिनों सियासी तापमान अपने चरम पर है। भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों ही दल के पार्षद और नेता अब खुलकर एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। मामला अब केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच की मांग और एक-दूसरे को घेरने की रणनीति के तहत निगम की साख पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा का वार: “कांग्रेस काल में मची थी लूट!”
भाजपा पार्षदों का आरोप है कि कांग्रेस के कार्यकाल में नगर निगम में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। कुछ पार्षद तो यहां तक कह रहे हैं कि जिन जगहों पर मटेरियल की सप्लाई ही नहीं हुई, वहां भी भुगतान कर दिया गया — वो भी मिलीभगत से! निगम के रिकॉर्ड्स और ठेकेदारों की मिली-जुली कहानी अब जांच के दायरे में है। भाजपा पार्षदों का कहना है कि नगर निगम अब जांच की छानबीन का नहीं बल्कि साफ़-सुथरे प्रशासन का उदाहरण बनना चाहिए।
कांग्रेस का पलटवार: “खराब गाड़ी में डल रहा डीजल!”
कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए नगर निगम में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मामला उठाया है। पार्टी का दावा है कि एक गाड़ी जो लंबे समय से खराब पड़ी है, उसी के नाम पर डीजल भरवाया जा रहा है। इतना ही नहीं, एक और विसंगति तब सामने आई जब एक पल्सर मोटरसाइकिल के नाम पर पेट्रोल नहीं बल्कि डीजल की एंट्री दर्ज हुई। सवाल बड़ा है – या तो गाड़ी हवा में उड़ रही है, या फिर फाइलों में हेरफेर का खेल चल रहा है!
निगम बना “काजल की कोठरी”
नगर निगम का हाल अब ऐसा हो गया है कि यहां जो भी आता है, बेदाग़ लौटना मुश्किल हो जाता है। कोई भी कुर्सी पर बैठता है, उस पर कोई न कोई आरोप जरूर लग ही जाता है। राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक गठजोड़ का ऐसा ताना-बाना बुन दिया गया है कि सच्चाई और झूठ में फर्क करना भी मुश्किल हो गया है।
महापौर की मंशा नेक, मगर सिस्टम ढीला?
महापौर कहें ‘न खाऊंगा’, अफसर बोले – ‘देखते हैं’
महापौर रामू रोहरा लगातार यह दावा करते हैं कि वे ‘न खाऊँगा, न खाने दूँगा’ की नीति पर चल रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि उनके इस संकल्प को ध्वस्त करने में कौन-कौन अधिकारी लगे हैं? अंदरखाने की बातें कहती हैं कि कुछ अफसरशाही के खिलाड़ी महापौर की ईमानदारी को चैलेंज मानकर सिस्टम को फिर से पुराने ढर्रे पर ले जाने में जुटे हैं। बावजूद इसके, महापौर अब तक अपनी छवि को लेकर सतर्क दिखाई देते हैं।
नेताप्रतिपक्ष बनाम उपनेता प्रतिपक्ष: समान सक्रियता, अलग शैली
नेताप्रतिपक्ष दीपक सोनकर तीन बार के पार्षद रह चुके हैं। इस बार उन्हें निगम में विपक्ष की कमान सौंपी गई है और वे पूरे दमखम के साथ विपक्षी भूमिका निभा रहे हैं।
दूसरी ओर, पहली बार पार्षद बने युवा नेता विशु देवांगन, उपनेताप्रतिपक्ष के रूप में तेजी से उभरते नजर आ रहे हैं। उनकी सक्रियता और ऊर्जा काबिल-ए-तारीफ है, मगर उनके कुछ बयान कई बार राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म देते हैं।
कुल मिलाकर, दोनों नेताओं की सक्रियता बराबरी पर है लेकिन उनकी कार्यशैली और बयानबाजी के कारण निगम में ‘ड्यूल लीडरशिप’ वाली स्थिति बनती नजर आ रही है।
निष्कर्ष: जांच से ही साफ़ होगी तस्वीर
इन तमाम विवादों, आरोपों और आरोपों के जवाबों के बीच सच की परतें तब तक नहीं खुलेंगी, जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी।
फिलहाल तो नगर निगम धमतरी एक ऐसा मंच बन गया है, जहां राजनीति, प्रशासन और आरोपों की तिकड़ी ने जनहित के मुद्दों को कोने में धकेल दिया है।
अब देखना ये है कि निगम की राजनीति में ये घमासान कब थमता है — या फिर यह धमतरी की जनता के लिए महज़ एक और “तमाशा-ए-सियासत” बनकर रह जाएगा!
