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राजनीति में आप जो देखते हो वैसा है नहीं। हम साथ साथ है,…..

धमतरी। धमतरी नगर निगम की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सत्ता पक्ष की आपसी मत भेद को लेकर शहर में काफी चर्चाएं है। मामला है आडिटोरियम टेंडर को लेकर खींच तान की जिसमें शहर के गलियारों सहित नगर निगम में इस बात की खुलकर चर्चा है कि महापौर और लोकनिर्माण विभाग के सभापति की बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा है ।

अब ये तो राजनीति है साहब जो समझ गए वो समझ गए जो न समझे इसे फालतू राजनीति चर्चा बनाकर आपसी में कार्यकर्ता भिड़ते रहते है। अब राजनीति में तो सब कुछ चलते रहता है इसे ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए।

जब एक विवाह समारोह में रामू रोहरा विजय मोटवानी नरेंद्र रोहरा मुस्कान भरे चहरों से एक दूसरे से प्रसन्नता से चर्चा करते मिलेइसी लिए कहते है कि बड़े नेता कब भिड़ते है और कब मिलते है इस बात का कयास बड़े देर से पता चलता है नगर निगम सहित राजनीतिक गलियारों में चर्चा व्याप्त है । की इन तीनों नेता के बीच कुछ अच्छा नही लेकिन लोग ये भी नहीं समझते कि ये तीनों नेता एक ही समाज के साथ साथ एक चचेरे भाई भी है। और भाई की रिश्ते कभी टूटते नहीं अगर भाई के ऊपर कोई मुसबित आयेगा तो सबसे पहले वही खड़ा होगा ।

चलो माना जाए इन तीनों के बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा हो लेकिन सबकी सोच को हम बया करते हुए यही चाहेंगे कि तीनों के मिलन से ही नगर निगम की राजनीति और शहर विकास गति प्रदान करेगापूर्व कार्यकाल की बातेअब रहा सवाल पूर्व कार्यकाल का तो उस समय नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे नरेंद्र रोहरा और सता पक्ष एम आई सी सदस्य सभापति रूपेश राजपूत इन दोनों की बहस हर सामान्य सभा बैठक में जमकर हुआ करता था विवाद इतना बड़ जाता था कि सदन के आला अधिकारी डर जाते थे कि कही हाथापाई की स्थिति न हो जाएं लेकिन जब ये दोनों नेता पक्ष विपक्ष बाहर निकलते थे या शाम को उनके होटल में मिलते थे तो बड़े मधुरता और आपसी प्रेम की भावना से राजनीतिक चर्चा को करते पाए जाते थे जिसमें लोगों के बीच चर्चा व्याप्त होता था कि दोनों नेता मिले हुए है लेकिन ऐसा नहीं यही राजनीति की परिभाषा होता है कि दोनों दलों को मन भेद हो जाए पर मत भेद नहीं तब कही जाकर कार्यकाल के साथ साथ शहर विकास संभव हो पाता है।

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