
गांजा तस्करों की डिज़ायर – सस्पेंस की रात, 30 किलो गांजा जप्त
25 अगस्त की उमस भरी रात।
महासमुंद जिले की NH-353 पर सन्नाटा पसरा था। सड़क पर कभी-कभी कोई ट्रक गड़गड़ाता हुआ गुजरता और फिर चारों ओर खामोशी। लेकिन उस रात खामोशी के पीछे एक तूफान पल रहा था।
मुखबिर की फुसफुसाहट….
शाम ढलते ही Anti Narcotics Task Force को एक गुप्त सूचना मिली—
” कुछ लोग उड़ीसा से गांजा लेकर आ रहे हैं… एक कार में… महासमुंद की ओर बढ़ रहे हैं।”
सूचना छोटी थी, मगर मुस्तैदी जरूरी थी।
तुरंत कोमाखान पुलिस को अलर्ट किया गया। प्लान तय हुआ—जाल वहीं बिछेगा, जहां वे सोच भी नहीं पाएंगे।
रात गहराते ही पुलिस की गाड़ियां चुपचाप सुवरमाल पेट्रोल पंप के पास खड़ी हो गईं। जवान तैनात ह, टॉर्च, और आंखों में सतर्कता लेकर… हर वाहन की जांच शुरू हो गई।
घड़ी की सुइयां खिंचती जा रही थीं।
और फिर… दूर से आती दो हेडलाइट्स अंधेरे को चीरती दिखीं।
वह गाड़ी थी—मारुति डिज़ायर (MP 16 ZA 5735)।
गाड़ी को रोका गया। अंदर तीन चेहरे बैठे थे। बेचैन, घबराए, जैसे किसी ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया हो।
नाम पूछे गए—
- कल्लू उर्फ कुलदीप यादव (38, झांसी, उ.प्र.)
- अभिषेक राय (40, छतरपुर, म.प्र.)
- पीयुष (41, नौगांव, म.प्र.)
उनसे सवाल किया गया—“ओडिशा क्यों आए? गाड़ी में क्या है?”
मगर उनके जवाब गोलमोल, हड़बड़ाए हुए। एक कहे कुछ, दूसरा कहे कुछ और। पुलिस के शक की आग अब भड़क चुकी थी।
आखिरकार आदेश हुआ—“डिक्की खोलो।”
जैसे ही डिक्की खोली गई, अंदर पड़ी थीं—बोरियां।
पुलिस ने बोरियों का मुंह खोला और सन्नाटा छा गया—30 किलो गांजा!
आरोपी अब बोलने की हालत में नहीं थे। पसीने से लथपथ, निगाहें झुकी हुईं। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया—
“उड़ीसा से माल लाते थे… और मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश में बेचते थे।”

तस्करों का साम्राज्य ढहा
पुलिस ने मौके पर ही जब्त किया—
- 30 किलो गांजा (कीमत ₹4,50,000)
- मारुति डिज़ायर कार (₹7,00,000)
- चार मोबाइल (₹10,000)
- नगदी ₹5,000
कुल ₹11,65,000 का माल पुलिस की गिरफ्त में आ चुका था।
तीनों आरोपियों पर NDPS Act की धारा 20(ख) में अपराध दर्ज किया गया। अब उनका ठिकाना जेल की सलाखें हैं, और आगे की जांच उनके पूरे नेटवर्क तक जाएगी—सोर्स से लेकर डेस्टिनेशन, और फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन तक।
यह पूरी कार्यवाही Anti Narcotics Task Force और महासमुंद पुलिस की संयुक्त सतर्कता का नतीजा थी।
उस रात, सन्नाटे भरी सड़क पर जो गाड़ी गुजरी, वह अपने साथ सिर्फ गांजा ही नहीं, बल्कि तीन तस्करों की किस्मत भी लेकर आई थी—और पुलिस ने उस किस्मत का रुख मोड़ दिया।
