
बच्चों को सनातन संस्कारों से जोड़ना साय सरकार का युगांतकारी निर्णय, सांस्कृतिक पुनरुत्थान का नया अध्याय: स्वप्निल तिवारी
पिथौरा-छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश की नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सनातन मर्यादाओं से अभिसिंचित करने के लिए लिया गया यह नीतिगत निर्णय का स्वागत करते हुवे भाजपा जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी ने कहा कि सरकार का यह निर्णय अत्यंत अभिनंदनीय एवं युगांतकारी है। उन्होंने इस कदम को छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक बड़े सांस्कृतिक पुनरुत्थान की शुरुआत बताया है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय से न केवल शैक्षणिक स्तर में सुधार होगा, बल्कि भावी पीढ़ी मानसिक और आत्मिक रूप से भी सुदृढ़ बनेगी।आगामी शिक्षण सत्र (2026-27) से लागू होंगे ऐतिहासिक बदलावस्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आगामी नए शिक्षा सत्र 2026-27 से प्रदेश के समस्त शासकीय विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं के स्वरूप में व्यापक और सकारात्मक बदलाव किए जा रहे हैं।
भाजपा जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी ने इन बदलावों की सराहना करते हुए बताया कि नए नियमों के तहत अब शासकीय विद्यालयों में निम्नलिखित दैनिक गतिविधियों को अनिवार्य किया जा रहा है: राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत का गौरव विद्यार्थियों के भीतर राष्ट्रप्रेम, एकता और अखंडता की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए दैनिक रूप से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का गायन होगा। मां सरस्वती वंदना ज्ञान, सुर और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना से ज्ञान के मंदिरों की शुरुआत होगी।वैदिक मंत्रों का सामूहिक गुंजन प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को जीवंत रखते हुए प्रार्थना सभाओं में गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और मध्याह्न भोजन से पूर्व भोजन मंत्र का सामूहिक उच्चारण अनिवार्य किया गया है।राष्ट्रनायकों की प्रेरक जीवनियाँ विद्यार्थियों में नैतिक साहस जगाने के लिए देश के महान क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों की प्रेरक जीवन गाथाओं का नियमित वाचन किया जाएगा।
विद्यालय केवल अक्षर ज्ञान के केंद्र नहीं, चरित्र निर्माण की आदि-पाठशाला हैं’शिक्षा के मूल और व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए स्वप्निल तिवारी ने अत्यंत गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा:विद्यालय केवल किताबी ज्ञान या अक्षर ज्ञान देने वाली व्यावसायिक संस्थाएं नहीं हैं। ये मूल रूप से मानव निर्माण, चरित्र निर्माण और संस्कारों की आदि-पाठशालाएं हैं।
जब हमारे नौनिहाल प्रतिदिन सुबह ईश्वर वंदना, वैदिक मंत्रों की सकारत्मक ध्वनि, गुरु मंत्र और राष्ट्रगीत के सुरों से अपनी दिनचर्या की शुरुआत करेंगे, तो उनके अंतस में राष्ट्रप्रेम, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का स्वतः ही संचार होगा।उन्होंने आगे जोड़ा कि महापुरुषों की जीवन गाथाएं विद्यार्थियों को महज एक छात्र से बढ़कर समाज और देश के प्रति उत्तरदायी एक उत्तम नागरिक बनने में मार्गदर्शन करेंगी। यह बच्चों को भटकाव से बचाकर एक आदर्श और मूल्यपरक जीवन जीने की प्रेरणा देंगी।
पाश्चात्य संस्कृति और अंधी दौड़ के बीच ‘मील का पत्थर’आज के आधुनिक, अत्यधिक डिजिटल और वैश्विक युग का विशेष रूप से जिक्र करते हुए भाजपा जिला प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में जहाँ पाश्चात्य संस्कृति (Western Culture) के अत्यधिक चकाचौंध और भौतिकवादी प्रभाव के कारण युवा पीढ़ी अपनी मूल जड़ों, पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान से दूर होती जा रही है, ऐसे संक्रमण काल में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह नीतिगत कदम बच्चों के सर्वांगीण, मानसिक, आध्यात्मिक और नैतिक विकास में **मील का पत्थर** साबित होगा।
यह निर्णय इस बात को सुनिश्चित करेगा कि छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी आधुनिक और तकनीकी शिक्षा में अव्वल रहने के साथ-साथ अपनी सनातनी जड़ों और सभ्यता से भी मजबूती से जुड़ी रहे।
इस सांस्कृतिक और युगांतकारी पहल का स्वागत करते हुए स्वप्निल तिवारी ने , क्षेत्र के शिक्षाविदों, प्रबुद्ध नागरिकों और पालकों की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, शिक्षा मंत्री एवं स्कूल शिक्षा विभाग के प्रति सहृदय आभार और धन्यवाद प्रकट किया है।
उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इस निर्णय के दूरगामी और अत्यंत सुखद परिणाम सामने आएंगे, जो छत्तीसगढ़ को देश के पटल पर एक संस्कारी, अनुशासित, समृद्ध और सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





Touch Me